चूड़ाकर्म संस्कार – Chudakarm Sanskar ya Mundan – हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में यह एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जिसमें बच्चे के जन्म के बाल काटने (मुंडन) की विधि संपन्न की जाती है। इसे शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह संस्कार आमतौर पर एक विशेष शुभ मुहूर्त में किया जाता है ।
चूड़ाकर्म संस्कार की पूजा विधि —
शुभ मुहूर्त का चयन —
विद्वान पंडित या ज्योतिषी से बच्चे के जन्म की कुंडली के आधार पर शुभ मुहूर्त का चयन कराएं ।
पूजा स्थल की तैयारी –
पूजा के लिए साफ और पवित्र स्थान चुनें।
एक वेदी स्थापित करें और गौरी गणेश, भगवान विष्णु, नवग्रह षोडस मातृका ,सप्त मातृका देवी
की स्थापना करें
सभी पूजा की आवश्यक सामग्री इकट्ठा कर ले
बाल काटने के लिए नये उस्तरा या कैंची की भी व्यवस्था कर ले नाइ की व्यवस्था भी कर ले।
पूजा विधि — संकल्प लेकर परिवार का मुखिया बच्चे के नाम और गोत्र आदि के साथ संकल्प ले
गणेश पूजन — सबसे पहले भगवान गौरी गणेशजी का आवाहन ध्यान कर उनकी पूजा करें। फिर अन्य देवताओं की पूजा करते हुए कलश की पूजा करे कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें हो
पूरी पूजा होने के बाद मुंडन प्रक्रिया करे
फिर मंत्रोच्चार करते हुए बच्चे के बाल काटने की प्रक्रिया आरंभ करें।
बच्चे को मंगल स्नान कराएं ,हल्दी चढ़ाए
फिर हवन करें ।
बालों को किसी पवित्र नदी तालाब या किसी पवित्र स्थान में प्रवाहित करें।
आशीर्वाद और दान —
सभी परिजन बच्चे को आशीर्वाद दें।
ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दक्षिणा दें।
भोज का आयोजन —
संस्कार के बाद परिवार और अतिथियों के लिए प्रसाद और भोजन का आयोजन करें।
चूड़ाकर्म संस्कार से लाभ –
चूड़ाकर्म संस्कार बच्चे के जीवन में शुभ ऊर्जा का प्रवेश कराता है और समाज व परिवार में उसके स्वास्थ्य और उन्नति के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की जाती हैं।
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